कल शाम 6 बजे लगभग मैं सपत्निक अपनी बाइक से जा रहा था, रास्ते में फुटपाथ पर एक व्यक्ति पडा हुआ था। शरीर में कोई हलचल नही थी। पत्नी ने कहा, देखो कैसे पडा है, कोई साधु लगता है; मैंने कहा होगा और हम आगे बढ गये। लगभग 3 घंटे बाद हम लौटे तो वह “साधु” ज्यों का त्यों पडा हुआ था। हम कयास लगाने लगे, गर्मी इतनी पड रही है, हो सकता है कि गर्मी की वजह से मर गया हो या कोई और बात हो, पता नहीं । लेकिन रात भर में तो इसको आवारा कुत्ते नोच डालेंगे। मन है, कह रहा था पुलिस को सूचना दे दो, कम से कम जिन्दगी के बाद लाश को तो सही मुकाम मिल जाए। लेकिन पुलिस …….। हिम्मत नही पडी। रात में काफी देर तक सोचता रहा, कैसे हुआ होगा, अब क्या होगा?...... इत्यादि।
नही रहा गया, सुबह मैं फिर उसे देखने गया कि यदि रात में कोई अन्यथा गडबड न हुई हो तो “उसका” कुछ प्रबंध किया जाए। वहां का दृश्य मुझे उसकी फोटो खींचने पर मजबूर कर दिया। आप भी देखें।

अब सोचता हूं कि शायद उसे कल इस जीवन से मुक्ति मिल गयी होती तो उचित ही होता। है कोई मोहल्ला जहां
ऐसे लोग न हों और है कोई मोहल्ला जहां ऐसे लोग
ना हों।
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